Title Aug-01-2018

जानें क्या है बाबा बैजनाथ धाम की कथा& हिंदू धर्म में बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का बड़ा महत्व हैA इन सभी से शिव की रोचक कथाएं जुड़ी हुई हैंA देवघर के वैद्यनाथ धाम में स्थापित कामना लिंग भी रावण की भक्ति का प्रतीक हैA बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक पवित्र वैद्यनाथ शिवलिंग झारखंड के देवघर में स्थित हैA इस जगह को लोग बाबा बैजनाथ धाम के नाम से भी जानते हैंA कहते हैं भोलेनाथ यहां आने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैंA इसलिए इस शिवलिंग को कामना लिंग भी कहते 12 ज्योतिर्लिंगों के लिए कहा जाता है कि जहां-जहां महादेव साक्षत प्रकट हुए वहां ये स्थापित की गईं इसी तरह पुराणों में वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की भी कथा है जो लंकापति रावण से जुड़ी हैA बाबा बैजनाथ धाम की कथा: भगवान शिव के भक्त रावण और बाबा बैजनाथ की कहानी बड़ी निराली हैA पौराणिक कथा के अनुसार दशानन रावण भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए हिमालय पर तप कर रहा थाA वह एक-एक करके अपने सिर काटकर शिवलिंग पर चढ़ा रहा थाA 9 सिर चढ़ाने के बाद जब रावण 10वां सिर काटने वाला था तो भोलेनाथ ने प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिए और उससे वर मांगने को कहाA तब रावण ने कामना लिंग को ही लंका ले जाने का वरदान मांग लिय रावण के पास सोने की लंका के अलावा तीनों लोकों में शासन करने की शक्ति तो थी ही साथ ही उसने कई देवता यक्ष और गंधर्वो को कैद कर के भी लंका में रखा हुआ था इस वजह से रावण ने ये इच्छा जताई कि भगवान शिव कैलाश को छोड़ लंका में रहें महादेव ने उसकी इस मनोकामना को पूरा तो किया पर साथ ही एक शर्त भी रखी उन्होंने कहा कि अगर तुमने शिवलिंग को रास्ते में कही भी रखा तो मैं फिर वहीं रह जाऊंगा और नहीं उठूंगाA रावण ने शर्त मान लीA इधर भगवान शिव की कैलाश छोड़ने की बात सुनते ही सभी देवता चिंतित हो गएA इस समस्या के समाधान के लिए सभी भगवान विष्णु के पास गएA तब श्री हरि ने लीला रचीA भगवान विष्णु ने वरुण देव को आचमन के जरिए रावण के पेट में घुसने को कहाA इसलिए जब रावण आचमन करके शिवलिंग को लेकर श्रीलंका की ओर चला तो देवघर के पास उसे लघुशंका लगीA ऐसे में रावण एक ग्वाले को शिवलिंग देकर लघुशंका करने चला गयाA कहते हैं उस बैजू नाम के ग्वाले के रूप में भगवान विष्णु थेA इस वहज से भी यह तीर्थ स्थान बैजनाथ धाम और रावणेश्वर धाम दोनों नामों से विख्यात हैA पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक रावण कई घंटो तक लघुशंका करता रहा जो आज भी एक तालाब के रूप में देवघर में हैA इधर बैजू ने शिवलिंग धरती पर रखकर को स्थापित कर दियाA जब रावण लौट कर आया तो लाख कोशिश के बाद भी शिवलिंग को उठा नहीं पायाA तब उसे भी भगवान की यह लीला समझ में आ गई और वह क्रोधित शिवलिंग पर अपना अंगूठा गढ़ाकर चला गयाA उसके बाद ब्रह्मा विष्णु आदि देवताओं ने आकर उस शिवलिंग की पूजा कीA शिवजी का दर्शन होते ही सभी देवी देवताओं ने शिवलिंग की उसी स्थान पर स्थापना कर दी और शिव-स्तुति करके वापस स्वर्ग को चले गएA तभी से महादेव कामना लिंग के रूप में देवघर में विराजते हैंA